शादी के दौरान होने वाली कई रस्मों को दारुल उलूम देवबंद ने नाजायज़ करार दिया! - The Siasat Daily

फि‍र आया फतवा, लाल रंग के खत पर तारीख लिखी तो निकाह माना जाएगा नाजायज

दारुल उलूम देवबंद के फतवा विभाग से एक युवक ने लिखित में तीन सवाल किए थे. इसमें युवक ने निकाह की तारीख मे लाल स्याही, महिलाओं के पैरों में बीछुए और छल्ले पहनने के साथ दुल्हन की विदाई मामा के गोद में उठाकर डोली में बिठाने के बारे मे पूछा था.

नई दिल्ली : दारुल उलूम देवबंद का 'नया फतवा' जारी, विदाई के वक्त भांजी को गोद में न ले मामा

मुस्लिम धर्म के ठेकेदार दारूम उलूम ने नया फतवा जारी किया है। भारत में विदाई के वक्त मामा भांजी को गोद में लेकर विदा करता है। भारतीय समाज में यह परंपरा बहुत पुरानी है। लेकिन दारुम उलूम को इस रिवाज से परहेज है।

अब भांजी को गोद में उठाकर मामा नहीं कर पाएंगे यह काम...

हाल ही में एक अपराध की खबर सामने आयी है जहाँ परम्परा के नाम पर गलत हुआ है. खबरों के अनुसार शादी के बाद जब दुल्‍हन विदा होती है तो मामा उसे गोद में लेकर कार या डोली में बिठाता ह... | News Track

दारुल उलूम ने मुस्लिम शादियों के लिए दिए दिशा निर्देश, 'दुल्हन को डोली तक गोद में ना ले जाएं मामा' - Current Crime

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दुल्‍हन को गोद में उठाने की रस्‍म जगा सकती है मामा के मन में काम-वासना: देवबंद

Practice of maternal uncle carrying bride to doli is unIslamic, says Darul Uloom Deoband fatwa. शादी के बाद जब दुल्‍हन विदा होती है तो मामा उसे गोद में लेकर कार या डोली में बिठाता है। भारत में यह पुरानी पंरपरा है, जिसका पालन किया जाता है, लेकिन दारुल उलूम देवबंद की नजर में यह परंपरा ठीक नहीं है।

शादी में भांजी को गोद में उठाने वाली परंपरा गैर-इस्लामी, मामा के मन में आ सकता है गलत खयाल: दारुल उलूम

दारुल उलूम देवबंद ने कहा कि एक महिला और उसके मामा के बीच का रिश्ता बहुत पवित्र होता है. मुस्लिम कानून के हिसाब से एक माम कभी भी अपनी जवान भांजी को गोद में नहीं उठा सकता

दुल्हन को गोद में उठाने से बिगड़ सकती है मामा की नीयत: दारुल उलूम– News18 हिंदी

दारुल उलूम ने एक और फतवा जारी किया है. मुस्लिम समुदाय में शादी की तारीख भेजने के लिए 'लाल खत' की रस्म को गलत बताया है. मुफ्तियों का कहना है कि ये रस्म गैर मुस्लिमों से आई है इसलिए इस रस्म को करना और इसमें शामिल होना जायज नहीं है. बेंच का कहना है कि 'लाल खत' के बजाए साधारण चिट्ठी भेजनी चाहिए या फिर फोन पर बातचीत कर तारीख तय की जानी चाहिए.

देवबंद ने जारी किया फतवा,निकाह के दौरान दुल्हन को गोद में ना उठाए मामा

मुस्लिम शादियों में गैर-इस्लामिक प्रथाओं के खिलाफ फतवा जारी किया है. दारुल उलूम देवबंद द्वारा जारी फतवे में लड़के के परिवार को भेजा जाने वाला लाल खत जिसे निमंत्रण पत्र भी कहते हैं

शादी के निमंत्रण पत्र, जेवरों पर देवबंद का फतवा, 'दुल्हन को डोली तक गोद में ना ले जाएं मामा'-Navbharat Times

सहारनपुर न्यूज़: दारूल उलूम देवबंद ने मुस्लिम शादियों में मानी जाने वाली गैर-इस्लामिक परंपराओं के खिलाफ फतवा जारी किया है। इनमें शादी के जेवर और निमंत्रण पत्र शामिल हैं। साथ ही, मामा के दुल्हन को डोली तक ले जाने की प्रथा को भी खत्म करने के लिए कहा गया है।

दारुल उलूम ने एक फतवा जारी किया है। उन्होंने मुस्लिम समुदाय में शादी की तारीख भेजने के लिए लाल खत की रस्म को गलत बताया है। इस बारे में मुफ्तियों का कहना है कि यह रस्म गैर मुस्लिमों से आई है इसलिए इस रस्म को करना और इसमें शामिल होना जायज नहीं है...